बस्ती के मालवीय रोड स्थित निजी अस्पताल की लापरवाही आई सामने, बिना न्यूरो सर्जन के चल रहा था हेड इंजरी का उपचार.
स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यह अस्पताल डॉ. प्रमोद चौधरी के नाम से 10 बेड के रूप में पंजीकृत है। अस्पताल में न्यूरो सर्जन की कोई तैनाती नहीं है, इसके बावजूद यहाँ गंभीर हेड इंजरी जैसी जटिल बीमारी का इलाज किया जा रहा था।
अजीत मिश्रा (खोजी)
एमबीबीएस डॉक्टर कर रहे थे सिर की गंभीर चोट का इलाज, 6 दिन बाद महिला की मौत; सीएमओ ने बिठाई जांच
- महिला की मौत पर परिजनों ने अस्पताल में किया हंगामा, सीएमओ ने डिप्टी सीएमओ को सौंपी मामले की जांच
- स्वास्थ्य विभाग की टीम ने अस्पताल पहुंचकर खंगाले दस्तावेज, कहा- जांच रिपोर्ट के आधार पर होगी आगे की कार्रवाई
बस्ती: शहर के मालवीय रोड स्थित एक निजी अस्पताल में चिकित्सा व्यवस्था की एक बड़ी और गंभीर लापरवाही सामने आई है। यहाँ न्यूरो सर्जन (तंत्रिका रोग विशेषज्ञ) की अनुपस्थिति के बावजूद एमबीबीएस डॉक्टरों द्वारा सिर की गंभीर चोट (हेड इंजरी) का इलाज किया जा रहा था, जिसके चलते छह दिनों के भीतर उपचाराधीन महिला की मौत हो गई। इस मामले के तूल पकड़ने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) ने जांच के आदेश दे दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
पेकोलिया थाना क्षेत्र के महादेवा गांव की निवासी लक्ष्मी (26 वर्ष), पत्नी विजय कुमार, 26 जुलाई को बाइक से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गईं थीं। उनके सिर में गंभीर चोट (हेड इंजरी) आई थी। परिजनों ने उन्हें शहर के मालवीय रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहाँ छह दिनों तक उनका इलाज चला। शनिवार सुबह उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। महिला की मौत के बाद परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया।
अस्पताल में नहीं था न्यूरो सर्जन
स्वास्थ्य विभाग की प्रारंभिक जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। यह अस्पताल डॉ. प्रमोद चौधरी के नाम से 10 बेड के रूप में पंजीकृत है। अस्पताल में न्यूरो सर्जन की कोई तैनाती नहीं है, इसके बावजूद यहाँ गंभीर हेड इंजरी जैसी जटिल बीमारी का इलाज किया जा रहा था।
सूचना मिलने पर सीएमओ कार्यालय की टीम मौके पर पहुँची और स्थिति को शांत कराया। बाद में परिजनों को शव सौंप दिया गया, जिसका अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
सीएमओ ने दिए जांच के आदेश
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजीव निगम ने बताया कि पूरे प्रकरण की गहन जाँच कराई जा रही है।
- जाँच इस बात पर केंद्रित होगी कि बिना न्यूरो विशेषज्ञ के हेड इंजरी जैसी गंभीर बीमारी का इलाज कैसे किया जा रहा था।
- डिप्टी सीएमओ डॉ. एसबी सिंह को इस मामले की जाँच अधिकारी नामित किया गया है।
- सोमवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने दोबारा अस्पताल पहुँचकर उपचार से जुड़े सभी अभिलेखों और दस्तावेजों की बारीकी से जाँच की।
जाँच रिपोर्ट सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ आगे की कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
बिखर गया हँसता-खेलता परिवार
इस दर्दनाक हादसे के बाद मृतका लक्ष्मी के पीछे उनके चार छोटे बच्चे (तीन बेटियां और एक बेटा) और पति छूट गए हैं। घटना के बाद से ही परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गाँव में शोक की लहर है।
मुख्य बिंदु:
- लापरवाही और नियमों की अनदेखी: डॉ. प्रमोद चौधरी के नाम से 10 बेड के रूप में पंजीकृत इस अस्पताल में न्यूरो सर्जन की कोई तैनाती नहीं थी। इसके बावजूद, हेड इंजरी (सिर में गंभीर चोट) जैसे अत्यंत संवेदनशील मामले का इलाज एमबीबीएस चिकित्सकों द्वारा किया जा रहा था।
- महिला की मौत: पेकोलिया थाना क्षेत्र के महादेवा गांव की निवासी लक्ष्मी (पत्नी विजय कुमार) को 26 जुलाई को बाइक से गिरने के कारण सिर में गंभीर चोट आई थी। उन्हें उक्त निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां छह दिनों तक चले उपचार के बाद शनिवार सुबह उनकी मौत हो गई।
- परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल: मृतका अपने पीछे पति सहित चार बच्चों (तीन बेटियां और एक बेटा) को छोड़ गई हैं। इस अप्रत्याशित और दर्दनाक घटना के बाद पूरे परिवार में कोहराम मचा हुआ है।
- प्रशासनिक जांच: मामले की गंभीरता को देखते हुए सीएमओ (मुख्य चिकित्सा अधिकारी) ने डिप्टी सीएमओ को जांच सौंपी है। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि अस्पताल में न्यूरो सर्जन उपलब्ध नहीं था, फिर भी गंभीर हेड इंजरी का इलाज किया जा रहा था। स्वास्थ्य विभाग की टीम दस्तावेजों और उपचार संबंधी कागजातों की दोबारा जांच कर रही है।
निष्कर्ष: यह घटना स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के नाम पर चल रहे उन झोलाछाप और अनधिकृत तौर-तरीकों की पोल खोलती है, जहां बिना विशेषज्ञ डॉक्टरों के ही मरीजों की जान से खिलवाड़ किया जाता है।


















